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Thursday, December 1, 2016


Oh my, my
It was a scandalous morning
I sat up on my bed 
wrapped up in a blanket
I was cold
I was frozen
And, I was hustling to find
That which was missing;
I ran to the corners
I took a plunge underneath my bed
It was getting on my nerves

Oh my, my
These daring brazen rays
Flirting with my naked skin
Lampooning and poking fun
I climbed up the shelves
Checked-out through the window
Trust me, will you?
It was getting on my nerves big time
Yet, I couldn’t find those.

Where are my boxers?
My blue, blue boxers
The one which wrapped me last night

Oh, yes! I recall
I was drunk, I was tipsy
And, I wore them, the boxers on my head
Instead of my Hat, Oops!


Copyright @ Ajay Pai 2016
Image courtesy : Aj's album



Monday, November 28, 2016

याद है मुझे आज भी 
 वो शाम 
सोंधी सी खुशबू थी 
महक रहा था आसमान 
सूरज सिसकियाँ लेते हुए 
बादल  की ओढ़नी में  छुपा था 
बिदाई का वक़्त था 
और मेरे नयन थे नम 

मगर, दुल्हन तू 
हँस  रही थी, खिलखिला रही थी 
ना कोई ग़म, ना आँसू
बांवरा मैं , सोच के बैठा
कि मेरे प्यार में थी तू पागल

मगर आज लगा है पता मुझे
तेरी उस हँसी का वजूद 
बिदाई तो  हुई थी तेरी 
पर मायका नहीं छूटा था 

और, मायका तेरा ले 
डूब गया है छोटा सा आशियाना मेरा !


Copyright @ Ajay Pai 2016

Image courtesy : Aj's album.



Sunday, November 27, 2016

जब आँखें बंद की थी मैंने
तब  तुम थी
आँखें  खुली, तो हुई तुम गायब
लुकाछुपी में थी तुम माहिर
अब सोचता हूँ मैं
 कि तुम सपना तो नहीं!

अब नींद आई तो
सहम के करवटें बदल लेता हूँ
 ये सोच के,
 कि सपनों में टकराये  ना अखियाँ हमारी!


Copyright @ Ajay Pai 2016

Image courtesy : Aj's album.

Thursday, November 24, 2016



साहिबा, जो पल गुज़ारे थे  हमने 
एक दूजे कि बाहों में, 
वो आज बस ख़याल बने मंडरा रहे  हैं !

दफन करदूँगा उन ख्यालों को आज 
लपेट के इस कोरे कागज़ के कफ़न में
बांधूंगा कस के इन काले लफ़्ज़ों में 
उन ख्यालों को आज
और लगाऊँगा मोहर  मियाद की !

पता चले दुनिया को 
कि, खत्म हुई है ये कहानी हमारी !


Copyright @ Ajay Pai 2016
Image courtesy : Aj's album.

Wednesday, November 23, 2016



इतनी जल्दबाज़ी क्यूँ करते हो, जनाब 
सांझ अभी तो जवान हुई है 
बहक जाने दो उन् अखियन में 
करवटें बदलने दो उनकी बाहों में 
इक रात ही तो है 
करीबी की,
रोशनी तो जुदा कर देती है !


Copyright @ Ajay Pai 2016
Image courtesy : www.104likes.com

Tuesday, November 22, 2016

आँसू तब भी निकले थे, 
ग़ालिब -
जब उसने नाता तोडा था !

और, आज भी अश्क़ निकले हैं 
जब मेला है यारों का सजा !

बस, फर्क सिर्फ इतना ही 
की आज मैं हँस पड़ा !


Copyright @ Ajay Pai 2016
Image courtesy : AJ's personal archive

Monday, November 21, 2016

साहिबा !

उन  होंटों में ऐसा नशा नहीं है
कि हम डगमगा जाए

नशा , तो दिल के टूटने से होता है 
बिखर के समेटने में होता है 
 रूह काँप उठती है 
होश गुम जाता है 
और, हंसी अश्क़ में ढल जाती है!

ये , नशा नहीं तो और क्या है ?



Copyright @ Ajay Pai 2016
Image courtesy : AJ's personal archive