Thursday, March 8, 2018

रू-ब -रू

ये तेरे घुंघुरू
जब थिरक उठते  हैं
लगता है मुझे कि
तू नाच रहा है बस मेरे लिए

मगर तू तो शिव है
जिसका आधा शरीर नर
और दूजा है नारी
शिव तू शक्ति भी तू

ऐसे में अक्सर सोचता हूँ कि
शिव के कैसे हैं
ये दो रूप ?

एक समुन्दर सा भीभत्स
दूजा झरने जैसा  शाँत
कौन सा है तेरा निज रूप

अगर तू है शिव, तो हूँ मैं कौन
झूम के नाच क्यूँ रहा हूँ मैं  बावरा
जब भी रू-ब -रू  होता हूँ तुझसे
है नहीं ये प्यार और नाही दोस्ती
हम हैं शायद एक ही रूहऔर एक जान 




Image courtesy : ardhanareeswaran (image does not belong to me)

Poem copyright +Ajay Pai  8th March 2018

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